मोहम्मद रफी के लिए ना लिख पाने का अफसोस, जावेद बोले- किस्मत ने यह मौका नहीं दिया

मुंबई में शनिवार को मशहूर गायक मोहम्मद रफी की याद में एक खास संगीतमय कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर और अभिनेता जितेन्द्र विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का नाम था ‘रूह-ए-रफी’, जिसमें संगीत की दुनिया के कई कलाकारों ने रफी साहब को अपनी श्रद्धांजलि दी।

जावेद अख्तर की अधूरी ख्वाहिश
इस मौके पर जावेद अख्तर ने भावुक होते हुए कहा कि उनका सबसे बड़ा अफसोस यही है कि वो उस दौर में गीत नहीं लिख पाए जब रफ़ी साहब जिंदा थे। उन्होंने बताया कि जब वह इंडस्ट्री में आए, तब वह बतौर स्क्रिप्ट राइटर सक्रिय थे और गीत लिखने का सिलसिला बाद में शुरू हुआ। अख्तर ने कहा कि दिल में हमेशा यह ख्वाहिश रही कि कभी उनके लिखे गीत को रफी साहब अपनी आवाज दें, लेकिन किस्मत ने यह मौका नहीं दिया।

मोहम्मद रफी के गीत
उन्होंने अपने पसंदीदा रफी गीतों का जिक्र भी किया, जिनमें ‘जाग दिल ए दीवाना’, ‘मेरी दुनिया में तुम आई’, ‘साथी न कोई मंजिल’ और ‘हुई शाम उनका ख्याल आ गया’ जैसे अमर गीत शामिल रहे। अख्तर ने कहा कि किसी सभ्य समाज की पहचान यही है कि वह अपने कलाकारों को याद रखता है और उन्हें सम्मान देता है। रफी साहब की आवाज लोगों के दिलों में आज भी वैसी ही गूंजती है जैसी उनके जमाने में गूंजा करती थी।

जितेंद्र की पुरानी धुनों को लेकर राय
वहीं अभिनेता जितेन्द्र ने भी रफी साहब के योगदान और पुराने संगीत की खूबसूरती पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आजकल हर दिन नए गायक सामने आ जाते हैं, लेकिन पुराने समय में सिर्फ चार-पांच गायक थे जिनकी आवाजों ने दशकों तक राज किया। जितेंद्र ने साफ कहा कि लता मंगेशकर, आशा भोसले, रफी साहब और किशोर कुमार जैसी शख्सियतों का जादू दोबारा पैदा करना लगभग नामुमकिन है। उनके मुताबिक आज भले ही टैलेंट की कोई कमी नहीं, लेकिन उस दौर की आत्मा और गहराई अब नहीं मिल पाती।

रफी साहब के लिए आयोजन
बता दें यह संगीतमय संध्या वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी, संगीतकार और लेखक राजेश धाबरे द्वारा प्रस्तुत की गई थी। धाबरे लंबे समय से रफी साहब की गायकी और उनकी विरासत को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इस शाम को ‘रूह-ए-रफी’ नाम देकर उन्होंने रफ़ी की आत्मा और सुरों को श्रद्धांजलि दी।

रफी साहब की अमर आवाज
मोहम्मद रफी को हिंदी सिनेमा का सबसे महान गायक माना जाता है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें रोमांटिक गीतों से लेकर भक्ति गीतों, देशभक्ति और ग़ज़लों तक में अमर बना दिया। चाहे ‘तेरी आंखों के सिवा’ हो या ‘क्या हुआ तेरा वादा’, रफी साहब की आवाज आज भी नई पीढ़ी के गायक और श्रोताओं के लिए प्रेरणा है।

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