किसानों की हरकतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पंजाब सरकार से पूछा- क्यों न की जाए गिरफ्तारी?

सुप्रीम कोर्ट ने सर्दियों में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार से कड़ा सवाल पूछा— “पराली जलाने वाले किसानों को गिरफ्तार कर कड़ा संदेश क्यों न दिया जाए?”

किसानों पर दंड की बात

सीजेआई ने कहा, “किसान विशेष हैं और हम उनकी वजह से भोजन करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पर्यावरण की रक्षा न हो। अगर कुछ लोग सलाखों के पीछे जाएंगे तो इससे सही संदेश जाएगा। आप दंडात्मक प्रावधानों पर विचार क्यों नहीं करते?”

सीजेआई ने यह भी सुझाव दिया कि पराली को जैव ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और इस दिशा में तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।

पंजाब सरकार का जवाब

पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि राज्य ने पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पिछले वर्षों में घटनाओं की संख्या 77,000 से घटकर 10,000 रह गई है। उनका तर्क था कि छोटे किसानों को गिरफ्तार करने से उनके परिवारों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

कोर्ट की चेतावनी

सीजेआई ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारियां नियमित रूप से नहीं बल्कि उदाहरण पेश करने के लिए की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि अगर राज्य खुद फैसला नहीं लेता, तो वह आदेश पारित करने के लिए बाध्य होगा।

राज्यों को निर्देश

यह सुनवाई उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में रिक्त पदों से जुड़ी एक स्व-प्रेरणा याचिका पर हो रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने चारों राज्यों को तीन महीने के भीतर रिक्तियां भरने का निर्देश दिया।

न्यायमित्र का आरोप

वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने कहा कि 2018 से बार-बार दिए गए आदेशों और सब्सिडी/उपकरणों के बावजूद जमीनी हालात में बहुत सुधार नहीं हुआ। राज्य अब भी “लाचारी” का बहाना बना रहा है।

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