बाड़मेर की बेटी बनी NCC की पहली महिला लेफ्टिनेंट, प्रेरणा देंगी जिले की बच्चियों को

बाड़मेर की सरिता अब लेफ्टिनेंट (ANO) सरिता के नाम से जानी जाएंगी। 2 बेटियों की मां सरिता लीलड़ ने मध्यप्रदेश के ग्वालियर ओटीए में 75 दिन की कड़ी एनसीसी ट्रेनिंग पूरी की। इसके बाद उन्हें एनसीसी में लेफ्टिनेंट के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
ट्रेनिंग के दौरान उन्हें अपनी बेटियों से दूर रहना पड़ा और बच्चों की याद में कई बार रोना भी पड़ा। लेकिन जब ट्रेनिंग पूरी कर लौटीं, तो सबसे पहले उन्होंने ससुर को सैल्यूट किया। उनका उद्देश्य अब स्पष्ट है – बाड़मेर की बच्चियों को एनसीसी में आगे बढ़ाना, जिससे उनमें देशसेवा, अनुशासन और करियर की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।
असिस्टेंट प्रोफेसर से एनसीसी की जिम्मेदारी तक
सरिता गर्ल्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। ट्रेनिंग के बाद वे बाड़मेर की पहली महिला असिस्टेंट एनसीसी ऑफिसर भी बन गई हैं।
सरिता ने बताया, “मैंने 2019 में बाड़मेर गर्ल्स कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद संभाला। 2020 में कॉलेज में एनसीसी विंग शुरू हुई और उसका चार्ज मुझे मिल गया। गर्ल्स का जूनून देखकर लगा कि मुझे ट्रेनिंग करनी चाहिए।”
परिवार का समर्थन और ट्रेनिंग का सफर
ग्वालियर में ट्रेनिंग के दौरान पति और परिवार के सदस्य वहां पहुंचे। सरिता ने अपनी ट्रेनिंग 7 जुलाई से लगातार 75 दिन तक पूरी की। उन्होंने कहा कि पहले इंटरव्यू में जा नहीं पाई थी, लेकिन दूसरे प्रयास में सफल हुईं।
उनका पीहर कोलू गांव है, लेकिन पिता की नौकरी के चलते उनकी पढ़ाई जोधपुर में हुई। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्हें RPSC की पोस्ट मिली और साल 2019 में फर्स्ट प्रयास में असिस्टेंट प्रोफेसर बनीं। कॉलेज ज्वाइन करने के साथ ही एनसीसी विंग खुली और उसे संभालने का मौका उन्हें मिला।
प्रेरणा बनेंगी बाड़मेर की बच्चियों के लिए
सरिता का लक्ष्य अब स्पष्ट है – बाड़मेर की बच्चियों को एनसीसी में प्रेरित करना और उन्हें आगे बढ़ाने का मार्गदर्शन देना। उनका यह सफर दिखाता है कि परिवार और खुद की मेहनत के बल पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में मिसाल कायम कर सकती हैं।



