हाई कोलेस्ट्रॉल: 70% से ज्यादा मरीज unaware, बढ़ रहा है हृदय रोगों का खतरा

दुनियाभर में लाखों लोग हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 70 प्रतिशत से ज्यादा मरीज इस बीमारी से अनजान हैं। नेशनल जियोग्राफिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति विशेष रूप से फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (एफएच) नामक आनुवंशिक विकार में देखने को मिलती है। इस बीमारी में खून में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल), जिसे बुरा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे हृदय रोग और स्ट्रोक का गंभीर खतरा होता है।

फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया का निदान रक्त परीक्षण और जेनेटिक टेस्टिंग से किया जा सकता है। इसका उपचार जीवनशैली में बदलाव और दवाओं के संयोजन से संभव है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और शराब से परहेज तथा डॉक्टर द्वारा सुझाई गई कोलेस्ट्रॉल-नियंत्रक दवाओं का सेवन करने से इस बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हृदय रोगों की बढ़ती संख्या

इंडियन हार्ट जर्नल और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में हृदय रोगों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसका एक बड़ा कारण अनडायग्नोस्ड हाई कोलेस्ट्रॉल है। अनुमान है कि भारत में हर 250 में से एक व्यक्ति फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया से प्रभावित हो सकता है।

वे लोग जिन्हें परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का इतिहास है, जिनका एलडीएल स्तर 190 या उससे अधिक रहता है, और जिनमें 30-40 वर्ष की उम्र में ही दिल के रोग के लक्षण दिखाई देते हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

माता-पिता से संतान को होता है संक्रमण

विशेषज्ञ बताते हैं कि यह बीमारी माता-पिता से संतान में जीन के माध्यम से संचारित होती है। यदि माता या पिता में से किसी एक को यह बीमारी है, तो बच्चे में इसके होने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत होती है। इस वजह से धमनियों में कोलेस्ट्रॉल तेजी से जमता है और हार्ट अटैक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है।

समय पर निदान जरूरी

एफएच की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। अक्सर लोग तब तक अनजान रहते हैं जब तक अचानक दिल का दौरा न पड़ जाए या नियमित मेडिकल जांच में इसका पता न चले। इसलिए चिकित्सक नियमित रक्त परीक्षण को अत्यंत आवश्यक मानते हैं।

वैश्विक चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जैसी संस्थाएं चेतावनी देती हैं कि यदि समय रहते जांच और इलाज न हो, तो यह समस्या हृदय रोगों की महामारी का रूप ले सकती है।

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