सरकार उठा रही कदम, अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को करने में जुटी: आर्थिक सचिव

आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि सरकार अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए एक कार्य योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भारी टैरिफ वृद्धि से निपटने के लिए घरेलू मांग बढ़ाने पर फोकस किया है, जिससे टैरिफ का दबाव झेल रहीं भारतीय विनिर्माण कंपनियों को मदद मिल सकती है।

घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद
अनुराधा ठाकुर ने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं और वे अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हैं। सरकार इस बात से वाकिफ है और टैरिफ के असर का आकलन कर रही है और इससे निपटने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य आयकर की घोषणा की थी, जिससे करदाताओं को काफी बचत होगी। सरकार ने जीएसटी सुधारों की भी घोषणा की है, जिससे कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा, उम्मीद से बेहतर मानसून कृषि उत्पादन को बढ़ावा देगा और इसके चलते ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ सकती है।

राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाने की राह पर
आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने विश्वास जताया कि सरकार बजट में निर्धारित 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है। केंद्र का अनुमान है कि 2025-26 के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत होगा। ठाकुर ने जोर देकर कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है और शुक्रवार को आए निजी उपभोग के आंकड़े भी सकारात्मक रुख दिख रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून में अपेक्षा से कहीं अधिक 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो पांच तिमाहियों में सबसे तेज है। इस पर अनुराधा ठाकुर ने कहा, ‘हमें लगता है कि पहली तिमाही में जिन बुनियादी विशेषताओं या कारकों ने हमें अच्छी स्थिति में रखा है, वे हैं विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्रों का अच्छा प्रदर्शन और कृषि क्षेत्र में मजबूत वृद्धि, साथ ही घरेलू मांग के कारक जिन्होंने विकास दर को मज़बूत किया है।’

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