डिप्टी CM कर्नाटक के खिलाफ CBI और BJP MLA की याचिकाएं, सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले (Disproportionate Assets) के मामले की जांच से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई अब जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी। सोमवार को चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस वी विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा, यह मामला पहले भी जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष लंबित था। इस पर कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, न्यायालय ने पहले ही कहा था कि राजनीतिक विवाद अदालतों में नहीं सुलझाए जाने चाहिए। इस पर सीजेआई गवई ने कहा, न्याय के हित में यही होगा कि इन याचिकाओं पर उसी पीठ में सुनवाई की जाए।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का यह मामला
गौरतलब है कि यह मामला कर्नाटक सरकार की तरफ से सीबीआई को दी गई सहमति वापस लेने से जुड़ा है। इस मामले में करीब दो साल पहले अक्तूबर 2023 में भी सीबीआई ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। तत्कालीन राज्य सरकार ने शिवकुमार के खिलाफ जांच की अनुमति वापस ले ली थी। भाजपा नेता बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उस समय भी अदालत ने ने शिवकुमार और राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

आमदनी से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप
बता दें कि 25 सितंबर 2019 को तत्कालीन भाजपा सरकार ने सीबीआई को अनुमति दी थी कि वह आयकर विभाग और ईडी की जांच के आधार पर शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करे। इस आधार पर सीबीआई ने करीब पांच साल पहले 3 अक्तूबर 2020 को मामला दर्ज किया। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर आरोप है कि उन्होंने 2013 से 2018 के बीच 74.93 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जो उनकी घोषित आय से अधिक है।

कर्नाटक हाईकोर्ट खारिज कर चुका है CBI और भाजपा विधायक की याचिकाएं
हालांकि, कांग्रेस नेता और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद 23 नवंबर 2023 को कर्नाटक सरकार ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के फैसले को ‘कानून के अनुरूप नहीं’ बताया। इसी के साथ सरकार ने सीबीआई को दी गई सहमति वापस ले ली। सीएम सिद्धारमैया नीत राज्य सरकार ने 26 दिसंबर 2023 को यह मामला लोकायुक्त को सौंप दिया। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 29 अगस्त 2023 को सीबीआई और यतनाल की याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

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