फर्जी साझेदारी से चला रहे थे ठेके; जांच में खुली पोल, 3 दुकानें सील, सरकारी राजस्व को 50 करोड़ का फायदा

यह है मामला
दरअसल, हरियाणा की गैंग्स के लिए झुंझुनूं में खुली शराब की दुकानें कमाई का जरिया है। वे ठेकेदारों को पहले दोस्ती का झांसा देते है, फिर जबरन साझेदारी मांगते है। और मना करने पर धमकाकर हिस्सेदारी हासिल कर लेते थे। नहीं तो जानलेवा हमला करते है।

साथ ही हरियाणा निर्मित शराब को हरियाणा से सटे राजस्थान के जिलों में भी बिक्री करने के लिए मजबूर करते है। इससे अधिकांश ठेकेदार डरकर या तो अपना काम छोड़ देते है, नहीं तो बदमाशों के आगे सरेंडर कर देते है।

बीते कुछ वर्षों में जिले के खानपुर, सिंघाना, चिड़ावा, स्वामी सेही और काकोड़ा जैसे इलाकों में यह स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी।

आबकारी और पुलिस के संयुक्त अभियान से बदली तस्वीर

झुंझुनूं के नए आबकारी अधिकारी रियाजउद्दीन उस्मानी ने कार्यभार संभालते ही हिस्ट्रीशीटरों की सूची पुलिस को सौंपी। रेंज IG अजयपाल लाम्बा के निर्देश पर जिलेभर में चेकिंग अभियान चला। सभी शराब की दुकानों(ठेकों) पर सुरक्षा जांच की गई।

जांच में पिलानी, नरहड़ और बगड़ की दुकानों में आपराधिक गतिविधियों और बदमाशों की पार्टनरशिप की पुष्टि हुई। इसकी रिपोर्ट पुलिस ने आबकारी विभाग को भेजी। इसके बाद तीनों ठेकों को निलंबित कर दिया गया। जांच कमेटी गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद दूसरी दुकानों पर भी पुख्ता कार्रवाई होगी।

15 ठेकों को संवेदनशील माना, लिस्ट बनाई
पुलिस ने रेगुलर गश्त के बाद रिपोर्ट तैयारी की। इसमें बसावता, घड़साना, खानपुर, नरहड़, देवरोड़, पिलानी, सिंघाना, बुहाना, गुढ़ा, पचेरी समेत कुल 15 ठेकों को ‘संवेदनशील’ के रूप में चिह्नित किया है। इन ठेकों पर पुलिस की विशेष निगरानी रहेगी और नियमित गश्त बढ़ाई जाएगी।

50 से ज्यादा बदमाश पकड़े
पुलिस ने अभियान के दौरान 50 से ज्यादा बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कई पर पहले से गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद गैंग कमजोर पड़ी, जिसके बाद ठेकेदारों ने फिर से दुकानों को नियमित खोलना शुरू कर दिया।

डर हटते ही बढ़ी कमाई, 50 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व
पिछले वित्तीय वर्ष(2024-2025) की तुलना में इस साल(2025-26) जिले में 50 करोड़ रुपए ज्यादा राजस्व आया है। पिछले साल 343 करोड़ की वसूली हुई थी, जबकि इस बार यह 393 करोड़ पर पहुंच गई। पुलिस का कहना है- ठेकेदार अब बिना ‘मंथली’ और धमकियों के कारोबार कर रहे हैं।

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