स्वास्तिक नगर में तालाब की पाल टूटने से भारी नुकसान, त्रासदी ने बिखेरे दर्द और आंसू

अजमेर के स्वास्तिक नगर के लोग बीते बुधवार तक बड़े आराम से जीवन जी रहे थे। दशकों से यह क्रम चला आ रहा था। सबकुछ सामान्य था। लेकिन गुरुवार देर रात जो हुआ उसने हाहाकार मचा दिया। लोग घर छोड़कर जान बचाने के लिए भागने लगे। उनके पैरों के नीचे पानी और आंखों में आंसुओं के सिवाय कुछ शेष नहीं था। दरअसल, न भूलने वाले ये हालात पैदा हुए हैं बोराज तालाब की पाल टूटने के बाद। कॉलोनी की गलियों और घरों में जलभराव और कीचड़ ने लोगों का जीवन नरक बना दिया है। करीब तीन फीट पानी अब भी जमा है, जिससे घर दलदल में तब्दील हो गए हैं।

तबाही के बाद अभी हालात सामान्य नहीं
गाड़ी हो या जिंदगी, यदि पटरी से उतर जाए तो वक्त लगता है। स्वास्तिक नगर त्रासदी के बाद अभी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। राहत-बचाव कार्य के बाद भी लोग उस सदमे से नहीं निकल पा रहे हैं।

बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप
जलभराव के कारण बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है। लोग अंधेरे में ही सफाई करने को मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे दिन-रात घरों से कीचड़ और गाद निकालने में जुटे हैं, लेकिन अथक प्रयासों के बावजूद हालात काबू में आते नहीं दिख रहे। हर ओर बदबू और गंदगी का माहौल लोगों की तकलीफें बढ़ा रहा है।

त्रासदी से पीड़ितों का दर्द
स्थानीय निवासी ज्योति का घर इस त्रासदी की दर्दनाक तस्वीर पेश करता है। उनका कहना है कि पिछले 24 घंटे से महिलाएं और बच्चियां लगातार सफाई कर रही हैं, लेकिन घर पूरी तरह दलदल में बदल गया है। पानी में डूबने से फर्नीचर और घरेलू सामान नष्ट हो गया, वहीं किचन की सारी खाद्य सामग्री भी खराब हो गई। मजबूरी में छोटे बच्चों को रिश्तेदारों और पड़ोसियों के घर भेजना पड़ा। संवाद के दौरान ज्योति की आंखें भर आईं और उन्होंने प्रशासन से जल्द मदद की गुहार लगाई।

बीमारी फैलने का खतरा
बड़े पैमाने पर पानी आने की वजह से लोगों के मकान और रोजमर्रा का सामान सबकुछ बर्बाद हो गया। अब एक बड़ी समस्या बीमारी के खतरे की है। घरों में रखे सामान से बदबू आ रही है। लोग सफाई में जुटे हुए हैं, लेकिन इसके बाद भी अभी कुछ दिनों तक डर बना रहने की संभावना है।

पूर्व सीएम गहलोत ने पैकेज की मांग की
प्रभावितों के दर्द की खबर पूर्व सीएम अशोक गहलोत को लगी। वे मौके पर पहुंचे। लोगों का हाल जाना। सरकार से राहत पैकेज की मांग की। बहते आंसुओं को पोंछने का प्रयास किया। अपना सबकुछ खो चुके लोगों का हौसला बढ़ाया। सहारा बनकर उन्हें संभाला। सरकारी तंत्र भी तुरंत राहत और बचाव कार्य में जुट गया।

Related Articles

Back to top button