भारत-अमेरिका डील पर सियासी घमासान: ट्रंप के ऐलान और मोदी सरकार की चुप्पी पर कांग्रेस के सवाल
ट्रंप के ऐलान पर उठे सवाल, मोदी सरकार पर कांग्रेस का निशाना

के बीच हाल ही में सामने आई व्यापारिक डील को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि अगर यह डील इतनी बड़ी कूटनीतिक जीत थी, तो इसका ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्यों नहीं किया? कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर सबसे पहले इस डील की जानकारी क्यों दी। क्या भारत ने अमेरिका के दबाव में चुप्पी साधे रखी?
इन सवालों के जवाब में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सामने आए और उन्होंने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
कांग्रेस का हमला: कूटनीतिक जीत या मजबूरी?
कांग्रेस का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की किसी भी बड़ी कूटनीतिक सफलता का ऐलान आमतौर पर प्रधानमंत्री या विदेश मंत्रालय की ओर से किया जाता है। ऐसे में ट्रंप द्वारा पहले डील की घोषणा करना कई सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह घटनाक्रम भारत-अमेरिका रिश्तों में असंतुलन को दिखाता है और यह संकेत देता है कि भारत ने अमेरिका की शर्तों के आगे झुककर चुप्पी साध ली।
कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या भारत सरकार इस डील की शर्तों को लेकर पूरी तरह पारदर्शी है या फिर देश को अधूरी जानकारी दी जा रही है।
पीयूष गोयल का जवाब: फैसला अमेरिका का था
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे मामले को गलत नजरिए से देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने पहले भारत पर टैरिफ लगाया था, और उसे घटाने या हटाने का फैसला भी अमेरिका का ही था।
पीयूष गोयल ने कहा,
“जब टैरिफ अमेरिका ने लगाया और बाद में उसे घटाने का निर्णय भी अमेरिका ने लिया, तो यह स्वाभाविक है कि इसकी जानकारी दुनिया को देने का अधिकार भी उसी देश का बनता है।”
‘समस्या भी अमेरिका से, समाधान भी अमेरिका से’
गोयल ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस मुद्दे की शुरुआत अमेरिका की तरफ से हुई थी। जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगाया, तो भारत को नुकसान उठाना पड़ा। अब जब समाधान निकला है और टैरिफ में राहत दी गई है, तो राहत देने वाले पक्ष के रूप में राष्ट्रपति ट्रंप का इसे सार्वजनिक करना बिल्कुल स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि इसे भारत की कमजोरी या दबाव में लिया गया फैसला बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों का व्यापक संदर्भ
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से वैश्विक राजनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। टैरिफ, बाजार पहुंच और व्यापार संतुलन जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच समय-समय पर मतभेद भी रहे हैं। ऐसे में टैरिफ में कटौती को दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि भारत के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है और यह फैसला भारतीय उद्योग और निर्यातकों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
सियासत जारी, निगाहें भविष्य पर
हालांकि पीयूष गोयल के जवाब के बाद भी कांग्रेस अपने सवालों पर कायम है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस डील की पूरी जानकारी संसद और जनता के सामने रखनी चाहिए।
अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस डील के तकनीकी और आर्थिक पहलुओं पर कितनी पारदर्शिता दिखाती है। फिलहाल, भारत-अमेरिका डील ने कूटनीति से ज्यादा सियासत का रंग ले लिया है।


